रणजी ट्रॉफी 2025 में छत्तीसगढ़ के खिलाफ मुंबई की ओर से खेलते हुए अजिंक्य रहाणे ने जबरदस्त बल्लेबाज़ी करते हुए 159 रनों की शानदार पारी खेली। लेकिन मैच के बाद उन्होंने मैदान से बाहर भी एक “शतक” जमाया — इस बार शब्दों से।
रहाणे ने खुलकर बीसीसीआई और चयनकर्ताओं की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में उम्र को लेकर जो सोच है, वह गलत है।
“उम्र सिर्फ एक नंबर है। अगर खिलाड़ी के अंदर जुनून और अनुभव है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मैं पिछले चार–पांच सालों से लगातार घरेलू क्रिकेट खेल रहा हूँ,” रहाणे ने कहा।
🔥 “अनुभव की अनदेखी गलत, मुझे ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ में चाहिए था मौका”
37 वर्षीय रहाणे ने कहा कि जब टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया में परेशानी झेलनी पड़ी, तो उन्हें लगा कि वहां उनका अनुभव काम आ सकता था।
“मैंने महसूस किया कि जब इतने अनुभव के बाद भी मुझे टीम से बाहर किया गया, तो कुछ तो अलग हुआ है। मुझे वापसी के बाद और मौके मिलने चाहिए थे। लेकिन कोई संवाद नहीं हुआ,” रहाणे बोले।
उन्होंने यह भी जोड़ा —
“मैं पूरी तरह तैयार था ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए, लेकिन चयनकर्ताओं ने मुझे नहीं चुना। फिर भी मैं अपना खेल एंजॉय कर रहा हूँ। चयन उनका निर्णय है, पर मुझे लगता है टीम को मेरी ज़रूरत थी।”
🧢 रहाणे बोले — “रन नहीं, इरादा मायने रखता है”
रहाणे ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि चयन केवल आंकड़ों पर नहीं, बल्कि खिलाड़ी की मानसिकता और मैदान पर उसके इरादे पर होना चाहिए।
“माइकल हसी ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 30 की उम्र के बाद डेब्यू किया और खूब रन बनाए। अनुभव मायने रखता है। मैं उम्र की बात पर भरोसा नहीं करता,” रहाणे ने कहा।
🧠 “रोहित और विराट जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की ज़रूरत टीम को हमेशा रहेगी”
रहाणे ने कहा कि केवल युवा खिलाड़ियों पर निर्भर रहना सही नहीं। टीम को हमेशा ऐसे खिलाड़ियों की ज़रूरत होती है जो कठिन परिस्थितियों में मैच बचा सकें।
“रोहित और विराट जैसे खिलाड़ियों ने भारत को कई जीत दिलाई हैं। हाँ, युवा खून जरूरी है, लेकिन अनुभव के बिना टीम संतुलित नहीं रहती, खासकर रेड बॉल क्रिकेट में।”
💬 “कई लोग खेल को समझे बिना बातें करते हैं”
अपना शतक पूरा करने के बाद रहाणे ने जश्न नहीं मनाया, बल्कि शांत तरीके से पवेलियन लौटे। जब उनसे इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा —
“मैं जानता हूँ मैं क्या कर सकता हूँ। जो लोग खेल को नहीं समझते, वे अक्सर बिना जानकारी के टिप्पणी करते हैं। मैंने हमेशा मुंबई के लिए अपना सबकुछ दिया है और यही मेरे लिए काफी है।”
🤝 सर्फराज़ खान का समर्थन भी किया
रहाणे ने सर्फराज़ खान के समर्थन में भी बयान दिया, जिनका चयन न होना हाल में विवाद का विषय रहा है।
“सर्फराज़ ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है। मैं बस यही कहूँगा कि वह ध्यान केंद्रित रखें और रन बनाते रहें। मुंबई क्रिकेट उनके साथ है, और वक्त आने पर उन्हें उनका हक़ मिलेगा,” रहाणे ने कहा।
🏁 निष्कर्ष
अजिंक्य रहाणे का यह बयान साफ़ तौर पर बताता है कि भारत के वरिष्ठ खिलाड़ी चयन प्रक्रिया से खुश नहीं हैं। उम्र, अनुभव और संवाद की कमी जैसे मुद्दे बार-बार सामने आ रहे हैं।
रहाणे की यह बात न सिर्फ चयनकर्ताओं के लिए एक संदेश है, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक प्रेरणा कि इरादा और जुनून हमेशा आंकड़ों से ऊपर होता है।
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