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रणजी ट्रॉफी 2025-26 — करुण नायर ने दोहरा शतक जड़कर चयनकर्ताओं को दिया कड़ा संदेश I


करुण नायर ने 389 गेंदों का सामना करते हुए अपनी पारी में 25 चौके और 2 छक्के लगाए — ऐसा संतुलित आक्रमण और धैर्य आजकल की फुर्तीली क्रिकेट में दुर्लभ है। नायर की यह पारी तकनीक और मानसिक मजबूती का आग़ाज़ थी: उन्होंने शुरुआत के दबाव, स्लो विकेट की चुनौतियाँ और गेंदबाज़ी लाइन-अप की विविधता को धैर्य से पढ़ा और क्रमशः रन जोड़े। जब टीम को झटके लगे, तब भी नायर ने पारी संभाली और समरन के साथ ऐसा साझेदारी किया कि कर्नाटक ने पहली पारी में 5 विकेट पर 586 रन तक पहुँचते हुए साइड-बाज़ी पर नियंत्रण कर लिया।

उनकी पारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि नायर में अभी भी टेस्ट क्रिकेट का टेम्परामेंट मौजूद है — लंबे समय तक टिकने और विपक्ष की योजनाओं को ध्वस्त करने की क्षमता अभी बरकरार है। घरेलू रिकॉर्ड भी इस सीजन पहले से ही प्रभावशाली रहा: गोवा के खिलाफ नाबाद 174 और सौराष्ट्र के خلاف अर्धशतक ने संकेत दिये थे कि उनका बल्ला फिर से तेज़ी पकड़ रहा है — और केरल के खिलाफ दोहरे शतक ने उस कड़ी को और मज़बूत किया।


करुण नायर को इस साल इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ के लिए टीम में शामिल किया गया था लेकिन उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा — चार टेस्ट मैचों में कुल 205 रन और औसत 25.62 पर सीमित रहे। चयनकर्ताओं ने उस प्रदर्शन को लेते हुए उन्हें टीम से बाहर रखा। उस फैसले पर प्रमुख चयनकर्ता अजीत अगरकर ने बताया कि प्रबंधन को इंग्लैंड में उनसे अधिक की उम्मीद थी।

नायर ने उस समय निराशा ज़ाहिर की थी, पर उन्होंने कहा कि उनका तरीका वही होगा — रन बनाना। और रणजी की पिचों पर उन्होंने अपने शब्दों को धरातल पर साबित कर दिया। उनकी हालिया पारियाँ यह संदेश देती हैं कि घरेलू क्रिकेट में लगातार उच्च प्रदर्शन से वे फिर से राष्ट्रीय टीम के चयन की दौड़ में वापसी कर सकते हैं।


कर्नाटक के इस मेगा-स्कोर में करुण नायर के अलावा रविचंद्रन समरन (रिपोर्ट के मुताबिक 220* रन) का योगदान भी अहम रहा। दोनों की बड़ी साझेदारी ने केरल की गेंदबाज़ों पर दबाव बनाया और मैच के रूप-रेखा को पूरी तरह कर्नाटक के पक्ष में ढाला। कर्नाटक ने पहले प्रथम पारी में 167 ओवर खेलकर 586/5 declared किया — एक ऐसी दीवार जो विपक्ष के लिए जवाब देना कठिन हो गयी। दूसरे दिन के अंत तक केरल ने 10 ओवर में 21/3 का स्कोर दिखाया, जो इस बात का संकेत था कि कर्नाटक की पोज़िशन कितनी मजबूत है।

यह संयुक्त प्रदर्शन घरेलू टूर्नामेंट के स्तर को और ऊपर उठाता है: जब अनुभवी बल्लेबाज़ और टीम-सहयोग से बड़े स्कोर बनते हैं, तब चयनकर्ता और राष्ट्रीय टीम मैनेजमेंट दोनों को गंभीरता से लेना पड़ता है।


करुण नायर का मनोबल और करियर माइलस्टोन

33 साल के करुण नायर के लिए यह सिर्फ एक पारी नहीं — उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मुक़ाम भी है। उन्होंने हालिया प्रदर्शन के साथ 9000 फर्स्ट-क्लास रन का आंकड़ा भी पार किया — और यह उपलब्धि कर्नाटक के इतिहास में उन्हें छठे खिलाड़ी के रूप में दर्ज कराती है। यह संख्या भी बताती है कि नायर ने वर्षों में किस तरह निरंतरता दिखाई है।

उनके शब्द — “मैं बस रन बनाऊँगा, वही मेरा काम है” — अब और अधिक प्रेरक लगते हैं, क्योंकि मैदान पर उन्होंने वही किया। निराशा के बाद भी हार न मानने वाली यह कहानी कई युवा खिलाड़ियों के लिए उदाहरण है: कतिपय चुनौतियाँ आती हैं, पर मुस्तैदी और मेहनत से खिलाड़ी फिर से ऊँचाई पर पहुँच सकता है।


अब सवाल यही है — क्या इस प्रदर्शन के बाद चयनकर्ता करुण नायर को 14 नवम्बर से शुरू होने वाली दक्षिण अफ्रीका टेस्ट सीरीज़ में मौका देंगे? नज़रें विशेषकर चयन समिति पर टिकी हैं क्योंकि राष्ट्रीय टीम को संतुलन, अनुभव और टेस्ट-अनुभव की ज़रूरत है — ऐसे में नायर का शॉट-रेंज और खेल की समझ उपयोगी साबित हो सकती है।

वहीं चयन पॉलिसी, टीम संयोजन और विपक्षी परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। पर इतना स्पष्ट है कि करुण नायर ने अपने बल्ले से चयनकर्ताओं को कठोर और साफ संदेश भेज दिया है — उन्हें नजरअंदाज करना अब आसान नहीं रहा।


विशेषज्ञ और पूर्व खिलाड़ियों की प्रतिक्रियाएँ

क्रिकेट विश्लेषकों और पूर्व खिलाड़ियों ने भी नायर के प्रदर्शन की सराहना की है। सोशल मीडिया पर #KarunNairComeback और संबंधित हैशटैग्स ट्रेंड हुए। कुछ पूर्व दिग्गजों ने कहा कि घरेलू फॉर्म और टेस्ट-फिटनेस का संयोजन राष्ट्रीय टीम के लिए फायदेमंद हो सकता है। कई मौजूदा विश्लेषक मान रहे हैं कि नायर जैसे खिलाड़ी से टीम को लाभ मिलेगा, खासकर अगर भारतीय टीम को शुद्ध टेस्ट-कंडीशन्स में अनुभव की आवश्यकता हो।


निष्कर्ष — यह पारी क्या दर्शाती है?

करुण नायर का 233 रन का शतक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है — यह एक संकेत है कि पुरानी गलतियाँ सिर्फ़ अस्थायी हो सकती हैं और खिलाड़ी की काबिलियत समय के साथ फिर से सम्हलकर उभर सकती है। यह पारी घरेलू क्रिकेट की ताक़त और महत्व को दर्शाती है: जब खिलाड़ी लगातार रन बनाते हैं, तो राष्ट्रीय स्तर के चयन न के बराबर मुश्किल हो जाते हैं।

नायर ने स्पष्ट कर दिया है — फॉर्म अस्थायी होता है, पर क्लास बनी रहती है। अब बारी चयनकर्ताओं की है कि वे इस पारी को किस नज़रिए से देखें: एक मजबूत घरेलू सीज़न के रूप में, या राष्ट्रीय टीम के लिए वापसी की शुरुआत मानकर नायर को मौका दें।


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