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52 साल का इंतज़ार खत्म — भारत की बेटियों ने रचा सुनहरा इतिहास जीता एकदिवसीय वर्ल्ड कप


🧨 शेफाली वर्मा और दीप्ति शर्मा बनीं हीरो — बल्ले और गेंद दोनों से किया कमाल

भारत की जीत की सबसे बड़ी नायिकाएं रहीं — शेफाली वर्मा और दीप्ति शर्मा
बारिश की वजह से मैच दो घंटे देरी से शुरू हुआ, लेकिन शेफाली ने शुरुआत से ही साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों पर दबाव बना दिया।

उन्होंने 78 गेंदों पर 87 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 7 चौके और 2 छक्के शामिल थे।
उनके साथ स्मृति मंधाना (45 रन) ने 104 रनों की साझेदारी कर भारत को मजबूत शुरुआत दी।

इसके बाद दीप्ति शर्मा (54 रन, 5 विकेट) ने ऑलराउंड प्रदर्शन दिखाते हुए मैच पलट दिया।
पहले बल्ले से अर्धशतक और फिर गेंद से पांच विकेट लेकर उन्होंने साउथ अफ्रीकी टीम की कमर तोड़ दी।
उनकी गेंदबाज़ी के सामने विरोधी कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट (101 रन) की शतक पारी भी बेकार चली गई।


इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारतीय महिला टीम पर पैसों की बारिश भी हुई।
आईसीसी ने इस बार कुल 122.5 करोड़ रुपये की प्राइज मनी दी — जो महिला क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी रकम है।

भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनने पर 4.48 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 39.55 करोड़ रुपये) मिले।
वहीं उपविजेता दक्षिण अफ्रीका को 2.24 मिलियन अमेरिकी डॉलर (19.77 करोड़ रुपये) की राशि दी गई।

बीसीसीआई ने भी महिला टीम के लिए अपनी “तिजोरी खोल दी” — और अतिरिक्त 51 करोड़ रुपये बतौर बोनस देने की घोषणा की।
हर खिलाड़ी को इस जीत का आर्थिक और भावनात्मक इनाम दोनों मिला।


कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पूरे टूर्नामेंट में टीम को संतुलित नेतृत्व दिया।
उन्होंने सही वक्त पर गेंदबाजी में बदलाव किए — खासकर जब उन्होंने शेफाली को गेंद थमाई, तो उसने तुरंत दो विकेट झटके।
उनकी कप्तानी की सबसे बड़ी खूबी थी — खिलाड़ियों पर भरोसा और शांत रहना।

मैच के बाद हरमनप्रीत ने कहा,

“यह जीत सिर्फ हमारी नहीं, पूरे देश की है। 2005 और 2017 के जख्म आज भर गए। हमारी बेटियों ने साबित किया कि वो किसी से कम नहीं।”


भारत की जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल था।
दिल्ली से लेकर देहरादून, मुंबई से लेकर चेन्नई तक आतिशबाज़ी, मिठाइयाँ और देशभक्ति के गीतों से सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा।

पूर्व कप्तान मिताली राज ने भावुक होकर कहा —

“आज हमारे सपने पूरे हुए। यह जीत सिर्फ खिलाड़ियों की नहीं, हर उस लड़की की जीत है जो क्रिकेट खेलने का सपना देखती है।”

राज्य सरकारों ने महिला खिलाड़ियों को सम्मानित करने की घोषणा की है।
बीसीसीआई जल्द ही मुंबई में एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित करेगी।


भारत की महिला टीम ने दिखा दिया कि अगर जज़्बा हो, तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं।
दीप्ति की गेंदबाजी, शेफाली की फायरिंग पारी, और हरमनप्रीत की कप्तानी ने मिलकर वो कर दिखाया जो 52 साल में कोई नहीं कर सका।

यह जीत भारत की महिला शक्ति की कहानी है — उस आत्मविश्वास की जो हर भारतीय लड़की को कहता है —
“अगर बेटियाँ ठान लें, तो इतिहास लिखा जा सकता है।”


✨ महिला वर्ल्ड कप 2025 का फाइनल सिर्फ एक मैच नहीं था, यह भारत की नई सोच, नई ऊर्जा और नए युग की शुरुआत थी।
जहाँ पहले पुरुष क्रिकेट के नाम पर तालियाँ बजती थीं, अब वही गर्व भारत की बेटियों के लिए गूँज रहा है।
यह जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है —
कि सपनों को पंख चाहिए तो बस मेहनत और विश्वास ज़रूरी है।


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