भारत के सबसे युवा अरबपतियों में शामिल और ज़ेरोधा (Zerodha) के सह-संस्थापक निखिल कामथ ने हाल ही में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने भारतीय क्रिप्टो समुदाय को चौंका दिया है। निखिल कामथ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके पास एक भी बिटकॉइन (Bitcoin) नहीं है, न ही उन्होंने कभी किसी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया है। यह बयान उन्होंने भारत की प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंज CoinDCX के CEO सुमित गुप्ता के साथ बातचीत के दौरान दिया।
जहां दुनिया भर में अरबपति और संस्थागत निवेशक बिटकॉइन और ब्लॉकचेन तकनीक को भविष्य की अर्थव्यवस्था मान रहे हैं, वहीं निखिल कामथ का यह रुख भारत में क्रिप्टो को लेकर बनी सावधानी, अनिश्चितता और नियामकीय भ्रम को दर्शाता है। दिलचस्प बात यह है कि निखिल कामथ ने एलन मस्क, रे डैलियो, नंदन नीलेकणी जैसे वैश्विक दिग्गजों से ब्लॉकचेन और क्रिप्टो पर गहन बातचीत की है, फिर भी वे खुद को इस विषय का विशेषज्ञ नहीं मानते।
उनका कहना है कि वे अभी सीखने के चरण में हैं और 2026 में बिटकॉइन को गहराई से समझने और एक्सप्लोर करने की योजना बना रहे हैं। यह बयान भारत में क्रिप्टो की मौजूदा स्थिति और बड़े निवेशकों की सोच को समझने के लिए बेहद अहम है।
🔹 निखिल कामथ का स्पष्ट बयान – “मेरे पास ज़ीरो बिटकॉइन है”
हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर हुई चर्चा में निखिल कामथ ने साफ शब्दों में कहा कि उनके पास कोई भी बिटकॉइन नहीं है और उन्होंने कभी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश नहीं किया। CoinDCX के CEO सुमित गुप्ता ने उनसे यह जानना चाहा कि कई बड़े क्रिप्टो और ब्लॉकचेन लीडर्स से बातचीत के बाद उनकी सोच में क्या बदलाव आया है।
निखिल कामथ का जवाब बेहद ईमानदार और चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि वे क्रिप्टो और बिटकॉइन के बारे में अभी पर्याप्त नहीं जानते और इसलिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं समझते। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे इस क्षेत्र को समझने के लिए समय लेना चाहते हैं और भविष्य में, खासतौर पर 2026 के आसपास, इस पर गंभीरता से विचार करेंगे।
यह बयान दर्शाता है कि भारत में केवल आम निवेशक ही नहीं, बल्कि बड़े उद्योगपति भी क्रिप्टो को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। यह रुख बताता है कि क्रिप्टो में निवेश केवल लोकप्रियता या ट्रेंड के आधार पर नहीं, बल्कि गहन समझ के साथ होना चाहिए।
क्रिप्टो दिग्गजों से बातचीत के बावजूद दूरी क्यों?
निखिल कामथ का लोकप्रिय WTF पॉडकास्ट दुनियाभर के प्रभावशाली बिजनेस लीडर्स और विचारकों को मंच देता है। इस पॉडकास्ट में उन्होंने एलन मस्क, रे डैलियो, नंदन नीलेकणी, रुचिर शर्मा जैसे दिग्गजों से ब्लॉकचेन, टेक्नोलॉजी और भविष्य की अर्थव्यवस्था पर चर्चा की है।
विशेष रूप से एलन मस्क के साथ हुए पॉडकास्ट ने इस बहस को और तेज कर दिया। एलन मस्क ने बिटकॉइन को “एनर्जी” से जोड़ते हुए कहा कि भविष्य में ऊर्जा ही असली मुद्रा बन सकती है। उनके अनुसार ऊर्जा को कानून से नियंत्रित नहीं किया जा सकता और बिटकॉइन इसी सिद्धांत पर आधारित है।
इसके बावजूद, निखिल कामथ मानते हैं कि केवल बातचीत से किसी विषय में विशेषज्ञता नहीं आ जाती। उनका कहना है कि वे अभी भी सीखने की अवस्था में हैं और बिना पूरी समझ के निवेश करना उनके निवेश दर्शन के खिलाफ है। यह सोच उन्हें अन्य कई निवेशकों से अलग बनाती है।
भारत सरकार का क्रिप्टो पर सख्त और संदेहपूर्ण रुख
निखिल कामथ का बिटकॉइन से दूर रहना भारत सरकार की क्रिप्टो को लेकर सतर्क नीति को भी दर्शाता है। भारत में अब तक क्रिप्टोकरेंसी को लेकर स्पष्ट और व्यापक नियम नहीं बनाए गए हैं। सरकार ने कई बार नियमन की बात कही, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस ढांचा सामने नहीं आया।
वर्तमान में भारत में क्रिप्टो से होने वाले मुनाफे पर 30% टैक्स लागू है, जो दुनिया के सबसे ऊंचे टैक्स स्लैब में से एक है। इसके अलावा TDS और अन्य अनुपालन नियमों ने भी निवेशकों का उत्साह कम किया है।
ऐसे माहौल में बड़े उद्योगपतियों का क्रिप्टो से दूरी बनाना असामान्य नहीं है। निखिल कामथ का बयान इस बात को रेखांकित करता है कि जब तक नीति स्पष्ट नहीं होती, तब तक भारत में बड़े पैमाने पर संस्थागत निवेश आना मुश्किल है।
क्या यह पारंपरिक वित्त बनाम डिजिटल एसेट की लड़ाई है?
निखिल कामथ पारंपरिक फाइनेंस (Traditional Finance) से जुड़े एक सफल उद्यमी हैं। ज़ेरोधा ने भारत में स्टॉक मार्केट निवेश को आम लोगों तक पहुंचाया है। ऐसे में उनका क्रिप्टो से दूरी बनाना यह दर्शाता है कि भारत में अभी भी पारंपरिक वित्तीय प्रणाली को अधिक भरोसेमंद माना जाता है।
यह स्थिति एक बड़े सवाल को जन्म देती है — क्या डिजिटल एसेट्स अभी भी मुख्यधारा के निवेशकों के लिए बहुत जोखिम भरे हैं? या फिर जानकारी और भरोसे की कमी इसकी सबसे बड़ी वजह है?
निखिल कामथ का यह रुख बताता है कि भारत में क्रिप्टो अपनाने की रफ्तार केवल टेक्नोलॉजी पर नहीं, बल्कि नीति, शिक्षा और स्थिरता पर भी निर्भर करेगी।
🔹 निष्कर्ष (Conclusion)
निखिल कामथ का यह स्वीकार करना कि उनके पास कोई बिटकॉइन नहीं है, भारतीय क्रिप्टो इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। यह दिखाता है कि केवल वैश्विक ट्रेंड या सोशल मीडिया हाइप के आधार पर निवेश करना हर बड़े निवेशक की रणनीति नहीं होती।
उनका रुख भारत में क्रिप्टो को लेकर मौजूद अनिश्चितता, नियामकीय अस्पष्टता और सतर्क मानसिकता को प्रतिबिंबित करता है। साथ ही, यह भी स्पष्ट करता है कि भविष्य में जब नियम स्पष्ट होंगे और समझ बढ़ेगी, तब बड़े निवेशक भी डिजिटल एसेट्स की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
निखिल कामथ का 2026 में बिटकॉइन को एक्सप्लोर करने का संकेत यह बताता है कि यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि भारत में क्रिप्टो की यात्रा अभी शुरुआती दौर में है।

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